एसकेएमसीएच में दो वर्ष के बाद एक बार फिर जेई (जापानी इंसेफेलाइटिस) का मरीज मिला है। इससे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। इससे पहले वर्ष 2019 में जेई के चार मरीज एसकेएमसीएच में भर्ती कराये गये थे।
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अभी मिला जेई का मरीज पश्चिम चंपारण के रामनगर के रहने वाले लालजी राम का 11 वर्षीय पुत्र प्रदीप कुमार है। प्रदीप को तीन सितंबर को एसकेएमसीएच में भर्ती कराया गया था। जांच में उसमें जेई की पुष्टि हो गई है। मंगलवार को एसकेएमसीएच के शिशु रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ गोपाल शंकर साहनी ने बताया कि मरीज की हालत गंभीर है। उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है। जेई के मरीज मिलने की रिपोर्ट राज्य स्वास्थ्य विभाग को दे दी गयी है।
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डॉ साहनी ने बताया कि नेपाल सटे जिलों में यह बीमारी ज्यादा पायी जाती है। मरीज को इलाज के लिए पहले बेतिया मेडिकल कॉलेज भर्ती कराया गया। वहां पांच दिन इलाज के बाद उसे एसकेएमसीएच में भर्ती कराया गया है। बच्चे में बुखार-सर्दी और उल्टी के बाद उसे डॉक्टर के पास परिजन ले गये। डॉ साहनी ने बताया कि जेई एईएस का ही प्रकार है। एईएस (एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम) के भी मामले सामने आ रहे हैं। एसकेएमसीएच में एईएस के अब तक 53 मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें 16 बच्चों की मौत हो गयी है। एसकेएमसीएच में चमकी बुखार से पीड़ित 71 बच्चे अबतक इलाज के लिए लाये जा चुके हैं। अब भी चमकी के दो संदिग्ध मरीजों का इलाज चल रहा है।
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गांव के डॉक्टर ने लगाया इंजेक्शन तो बिगड़ी तबीयत
प्रदीप कुमार के पिता लालजी राम ने बताया कि छह दिन पहले जब बच्चे को बुखार लगा तो उसे गांव के ही डॉक्टर से दिखाया। डॉक्टर ने इंजेक्शन लगाया तो उसकी तबीयत और बिगड़ गयी। इसके बाद उसे रामनगर पीएचसी ले गये। लेकिन वहां के इलाज से भी तबीयत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उसी रात उसे बेतिया मेडिकल कालेज अस्पताल ले गये। वहां इलाज के बाद बच्चे को एसकेएमसीएच रेफर कर दिया गया।
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पटना भेजी गयी मरीज की जानकारी
जेई के मरीज के मिलने के बाद एसकेएमसीएच से इसकी जानकारी पटना स्वास्थ्य विभाग को भेजी गयी। शिशु रोग विभाग के अध्यक्ष ने बताया कि सोमवार रात ही मरीज की रिपोर्ट आयी है, इसके बाद मंगलवार को इसकी रिपोर्ट पटना स्वास्थ्य मुख्यालय भेजी जा रही है। उन्होंने बताया कि मरीज की हालत भले ही गंभीर है लेकिन उसे ठीक करने का पूरी कोशिश की जा रही है।
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देखरेख में मेडिकल टीम तैनात
जेई के मरीज मिलने के बाद शिशु रोग विभाग के डॉक्टर और नर्स बच्चे की निगरानी कर रहे हैं। डॉ साहनी ने बताया कि हम लगातार बच्चे की हालत पर नजर बनाये हुए हैं। डॉक्टर और नर्स की तैनाती बच्चे के पास कर दी गयी है। बच्चे की हालत की रिपोर्ट मेरे पास लगातार आ रही है। बच्चे की स्थिति के अनुसार उसका इलाज चल रहा है।
Input: Hindustan
