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शहाबुद्दीन दूध के धुले हैं?- जब प्रभु चावला ने इस सवाल पर बोले थे लालू यादव- कौन दूध का धुला है इस देश में?

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By Editor On May 1, 2021
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राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव हमेशा से अपने साफ बयानों और चुटीले अंदाज के लिए जाने जाते हैं। हालांकि, उनकी पार्टी पर कई बार अपराधियों और माफियाओं के संरक्षण के भी आरोप लगते रहे हैं। ऐसा ही एक नाम रहा है राजद की ओर से सांसद और विधायक रह चुके शहाबुद्दीन का, जो कि लालू की छत्रछाया में ही राजनीति की दुनिया में भी आगे बढ़े। हालांकि, लालू ने शहाबुद्दीन के आपराधिक मामलों का खुलासा होने के बाद भी हमेशा ही उसका समर्थन किया। इसका एक नजारा कुछ साल पहले एक टीवी इंटरव्यू में भी दिखा था। जब एंकर ने शहाबुद्दीन के अपराधों को लेकर लालू से सवाल किया था। इस पर राजद नेता ने यहां तक कह दिया कि आखिर इस देश में दूध का धुला कौन है?


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दरअसल, प्रभु चावला ने लालू से पूछा कि आपके जो लोग हैं बूटा सिंह (बिहार के पूर्व राज्यपाल) जैसे जो ऐसे अफसरों को ट्रांसफर कर देते हैं। शहाबुद्दीन जैसे आदमी को छोड़ दिया जाता है। तो नजरिया तो गलत बनेगा। तीन-तीन वॉरंट हों, फिर भी पकड़ नहीं पाते।


इस पर लालू प्रसाद यादव ने कहा, एक गलत अफसर ने पक्षपाती होकर के गलत केस किया। केस हुआ न्यायपालिका में। वे कानून मानने वाले नागरिक हैं। इस पर जब प्रभु चावला ने पूछा कि आपको लगता है शहाबुद्दीन दुध के धुले हैं। उनके खिलाफ कोई क्रिमिनल केस नहीं हैं। उनको अरेस्ट नहीं किया जाना चाहिए। इस पर लालू ने कहा, “कौन दूध का धुला है इस देश में। क्रिमिनल केस बनावटी है। वो जाएंगे सरेंडर करेंगे।”


कौन है शहाबुद्दीन?: बाहुबली शहाबुद्दीन पहली बार राजनीति की गलियों में लालू प्रसाद यादव की छत्रछाया में ही आया। जनता दल में आते ही शहाबुद्दीन की ताकत और दबंगई दिखने लगी। साल 1990 में शहाबुद्दीन को विधानसभा का टिकट मिला और वह जीत गया। शहाबुद्दीन ने 1995 में भी चुनाव जीता। उसकी बढ़ती ताकत को देखते हुए पार्टी ने 1996 में लोकसभा का टिकट थमाया और शहाबुद्दीन सांसद बन गया।


रिकॉर्ड के मुताबिक, उस पर पहली एफआईआर 1986 में सिवान जिले के हुसैनगंज थाने में दर्ज हुई थी। शहाबुद्दीन पर 50 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। इनमें से 6 में उसे सजा हो चुकी है। भाकपा माले के कार्यकर्ता छोटेलाल गुप्ता के अपहरण व हत्या के मामले में वह आजीवन कारावास की सजा भुगत रहा है। 2003 में शहाबुद्दीन को वर्ष 1999 में माकपा माले के सदस्‍य का अपहरण करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। शहाबुद्दीन पर 2004 में प्रतापपुर गाँव में दो भाइयों को तेजाब से नहलाकर मारने का भी आरोप है। इस केस में उसे उम्रकैद की सजा मिली है।

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