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खेला होबे ; बंगाल चुनाव में 0.1% वोट भी नही जुटा पाई CM नीतीश की JDU, कई उम्मीदवारों की जमानत जब्त

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पटना: बड़े अरमान से JDU ने बंगाल और असम में विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमाई थी, उम्मीद थी कि दोनो राज्यों में JDU का प्रदर्शन बेहतर होगा और JDU के राष्ट्रीय पार्टी बनाने का सपना भी पूरा होगा, लेकिन जब चुनाव परिणाम आया तो एक कहावत है लुटिया भी डूबना तो कुछ ऐसा ही हाल बंगाल और असम में जेडीयू के साथ हुआ. खास कर के बंगाल में तो नीतीश कुमार की पार्टी एक फीसदी वोट भी नहीं पा सकी.

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नहीं मिल रहे थे उम्मीदवार
JDU ने बंगाल में 50 से ज़्यादा उम्मीदवार उतारने का दावा किया था लेकिन हैरानी की बात ये थी कि JDU को बंगाल में उम्मीदवार भी नहीं मिल रहे थे. बंगाल में JDU के चुनाव प्रभारी ग़ुलाम रसूल बलियावी ने दावा किया था की कई पार्टियों के नेता JDU के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन कुछ परिस्थितियां ऐसी रहीं की बात नहीं बन पाई. बंगाल में इस बार का चुनाव दो ध्रुवो में बदल गया जिसका ख़ामियाज़ा कई पार्टियों को उठाना पड़ा फिर भी हम बहादुरी से लड़े. बलियावी ने कहा कि चुनाव परिणाम क्या आया ये अलग बात है लेकिन हमने मेहनत करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी.

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जमानत तक नहीं बचा सके उम्मीदवार
दरअसल JDU के साथ बंगाल चुनाव में खेला हो गया. उम्मीदवारों के लिए मशक़्क़त करनी पड़ी और जब उम्मीदवार मिले और लड़े तो अपनी जमानत भी नहीं बचा सके और जब अंतिम चुनाव परिणाम आया और JDU को मिले वोट का जो प्रतिशत था वो JDU के लुटिया डूबने की पूरी कहानी बयां कर गया. JDU का बंगाल चुनाव में मिले वोट का प्रतिशत था 0.02 प्रतिशत. साफ था बंगाल चुनाव में JDU की लुटिया पूरी तरह से डूब चुकी थी.

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एक नजर JDU प्रत्याशियों को मिले वोट पर
चौरंगी सीट से अनिल सिंह को 81 वोट, कुमार ग्राम से कलावती को 1399 वोट, कोलकाता पोर्ट से मंजय राय को 175 वोट, इंगलिश बाज़ार से उमा दास को 275 वोट, हावड़ा दक्षिण से अमित घोष को 654 वोट, रानीगंज से राजकुमार पासवान को 1609 वोट, नलहटी से अमरजीत को 984 वोट, चाकुलिया से कामाख्या सरकार को 954 वोट, दमदम से संजीवन हजारा को 915, इंटाली से नुरुल हुदा को 137 वोट, हावड़ा मध्य से अनामिका सिंह को 545 वोट, जमुरिया से गौरीशंकर बनर्जी को 1484 वोट मिले.

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दिल्ली से लेकर यूपी तक में मिली है हार
ज़ाहिर है JDU पिछले कुछ सालो से लगातार कई राज्यों के विधानसभा चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारती है ताकि JDU को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल सके लेकिन अधिकांश राज्यों में JDU का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है. चाहे दिल्ली हो झारखंड हो उतर प्रदेश या कई और दूसरे राज्य, JDU को हर जगह झटका लगा है. ऐसे में जेडीयू के राष्ट्रीय पार्टी बनने का सपना फिलहाल सपना ही रह गया.

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Input: News18

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