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बिहार में लॉकडाउन की आहट!, स्कूल कॉलेज बंद के बाद अब धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा प्रतिबंधों का दायरा

क्या बिहार में एक बार फिर लग सकता है लॉकडाउन? दरअसल प्रदेश में कोरोना की दूसरी लहर में लगातार बढ़ते मरीजों की संख्या और और हालात को देखकर अंदेशा लगाया जा रहा है। कोरोना सेकेंड वेव के चलते प्रदेश में सरकार की ओर से सबसे पहले स्कूल-कॉलेज शिक्षण संस्थान बंद करने के आदेश के बाद अब प्रतिबंधों का दायरा धीरे-धीरे बढ़ाया गया है।

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नये आदेश के मुताबिक बिहार में सभी दुकानें और प्रतिष्ठान शाम सात बजे तक ही खुलेंगे। यह रोक रेस्टोरेंट, ढाबा और भोजनालय और होटल पर नहीं रहेगी, लेकिन इन सभी का संचालन कोरोना बचाव के लिए तय शर्तों के साथ होगा। सभी दुकानों और प्रतिष्ठानों में सभी के लिए मास्क का उपयोग अनिवार्य होगा। काउंटर पर कर्मियों और आगंतुकों के लिए सैनेटाइजर की व्यवस्था अनिवार्य रहेगी। दुकान और प्रतिष्ठान के परिसर में सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन जरूरी होगा।

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को कोरोना को लेकर उच्चस्तरीय बैठक की। इसके बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर आपदा प्रबंधन समूह की हुई बैठक में उक्त फैसले लिये गए। मुख्यमंत्री ने शाम को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि नाइट कर्फ्यू पर अभी फैसला नहीं लिया गया है। तीन-चार दिनों की कोरोना की स्थिति को देखते हुए आगे इस पर हमलोग निर्णय लेंगे। मुख्यमंत्री की मौजूदगी में आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने बताया कि सभी होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा अपनी क्षमता से 25 प्रतिशत तक उपयोग कर लोगों को बैठाएंगे। होम डिलीवरी और टेक अवे के संचालन पर रोक नहीं रहेगी। सभी सिनेमा हॉल बैठने की क्षमता का 50 प्रतिशत का उपयोग करेंगे। सभी पार्कों और उद्यानों में मास्क का प्रयोग और कोरोना बचाव के व्यवहार करना अनिवार्य होगा। सभी धार्मिक स्थल आमजनों के लिए बंद रहेंगे। सरकारी कार्यालयों में उप सचिव, इनके समकक्ष तथा इनसे वरीय अधिकारी शत-प्रतिशत आएंगे। उनके अधिनस्थ कर्मचारी और पदाधिकारि बारी-बारी से 33 प्रतिशत उपस्थित रहेंगे।

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आवश्यक सेवाएं पर शर्तें लागू नहीं
आवश्यक सेवाएं जैसे पुलिस, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन, फायर ब्रिगेड, दूरसंचार, डाक, बैंक आदि पर ये लागू नहीं होंगे। निजी कार्यालय और संस्थान के व्यावसायिक और गैर व्यावसायिक 33 प्रतिशत कर्मियों के साथ खोलने के लिए अनुमति होगी। किंतु औद्योगिक प्रतिष्ठानों पर यह बंधन लागू नहीं होगा। वे यथावत पूर्व की भांति काम करेंगे। पब्लिक ट्रांसपोर्ट में निर्धारित बैठने की क्षमता के 50 प्रतिशत के उपयोग की अनुमति रहेगी। शुक्रवार को ये कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं।

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शादी-श्राद्ध में 200 लोग ही रहेंगे 
सार्वजनिक स्थलों पर किसी भी प्रकार के सरकारी अथवा निजी आयोजन पर रोक रहेगी। अंतिम संस्कर के लिए 50 तथा श्राद्ध और विवाह के लिए 200 लोगों तक की सीमा रहेगी।

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कोरोना टीका की कहीं कमी नहीं
पत्रकारों के सवाल पर स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने कहा कि कोरोना टीका की राज्य में कही कमी नहीं है। आज नौ लाख टीका आया है, जिन्हें सभी जिलों में भेजा जा रहा है। कहा कि जो भी कोरोना जांच राज्य में हो रही है, उनमें 68 प्रतिशत आरटीपीसीआर हो रही है।

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सर्वदलीय बैठक पर राज्यपाल से की बात
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार की मीटिंग में राज्यपाल के स्तर पर भी जागरूकता के लिए पहल करने की बात कही थी। इसी आलोक में आज मैंने राज्यपाल फागू चौहान से बात की है। आठ-दस दिनों के अंदर सर्वदलीय बैठक बुलाई जाएगी। राज्यपाल ने अपनी सहमति दे दी है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद और शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी के अलावा तमाम आलाधिकारी उपस्थित थे।

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राज्य के स्कूल-कॉलेज व कोचिंग संस्थान 18 अप्रैल तक बंद रहेंगे
राज्य के सभी स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थान 18 अप्रैल तक बंद रहेंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि बच्चे और बच्चियों की रक्षा के लिए यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए पूर्व में 11 अप्रैल तक के लिए स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थान बंद किये गए थे। मगर कोरोना वायरस का संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। इसको देखते हुए इसकी अवधि और बढ़ा दी गई है।

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पूर्व से निर्धारित परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी
हालांकि इस दौरान पूर्व से निर्धारित परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी, लेकिन इन परीक्षाओं में भी कोरोना बचाव के प्रोटोकॉल का अनुपालन सभी के लिए अनिवार्य रहेगा। गौर हो कि पहले से ही यह व्यवस्था लागू थीं

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ट्रेन से आने वालों की स्टेशन पर ही जांच
ट्रेनों से बिहार आने वालों की रेलवे स्टेशनों पर ही जांच होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कई राज्यों में कोरोना के मामले काफी गंभीर हैं। वहां से बिहार के लोग लौटेंगे तो उनकी कोरोना जांच की व्यवस्था रेलवे स्टेशनों पर ही की गई है। जांच में जो लोग संक्रमित पाये जाएंगे, उनके इलाज के लिए अस्पताल अथवा आइसोलेशन सेंटर में उनकी स्थिति को देखते हुए भेजा जाएगा। एयरपोर्ट पर भी जांच की व्यवस्था की गई है।

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अनुमंडलों में बनेंगे क्वारंटाइन सेंटर
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार अनुमंडल स्तर पर क्वारंटाइन सेंटर बनेंगे। बाहर से आने वाले जिनकी जांच रिपोर्ट निगेटिव आएगी, वे चाहें तो उनके वहां रखने की व्यवस्था होगी। जो वहां नहीं रहना चाहेंगे उन्हें सलाह दी जाएगी कि वे घर जाकर कोरोना बचाव का पालन ठीक से करें। यह भी कहा कि पिछले साल प्रखंड स्तर पर क्वारंटाइन सेंटर बने थे, जहां पर 15 लाख लोगों को रखने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन अब काफी कुछ अनुभव हुआ है। उसी अनुसार जो जरूरी चीजें हैं, उन्हें किया जा रहा है।

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि- नाइट कर्फ्यू के बारे में अभी नहीं सोचा है। तीन-चार दिनों में स्थिति को देखकर इस पर निर्णय लिया जाएगा। हमारी कोशिश है कि अधिक से अधिक जांच और टीकाकरण हो। अनुमंडल स्तर पर क्वारंटाइन सेंटर बनाए जाएंगे। लोग सचेत रहें। आवश्यक हो तभी घर से निकलें। मास्क अवश्य पहनें। साथ ही कोविड प्रोटोकॉल का गंभीरता से पालन करें। सरकार हर स्थिति पर बारीक नजर रख रही है। लोगों की किसी तरह की परेशानी नहीं हो, इसके लिए एक-एक चीज की समीक्षा रोज की जा रही है। कोरोना जांच और टीकाकरण दोनों को बढ़ाया जा रहा है। 11 से 14 अप्रैल तक टीकाकरण अभियान चलाकर रोज चार लाख किये जाएंगे।

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Input: Hindustan

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